जल स्रोत का दोहन आने वाले दसक पर भारी होने वाला है। जल की कमी हम सभी को बहुत की जल्द महसूस होने वाला है। इन सभी समस्यों को दरकिनार करना सभी को महंगा पड़ेगा। एक एक बूंद तरस्ता जीवन कैसा खतरनाक होगा इस की कलप्ना करना ही मानस पटल को झक झोर देता है। आज हम जल को इस्तमाल तो कर रहे है और इसे फ़ेक भी रहे है हमारे देश मे आमतौर पर जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चलाये जाते है वे एरोबिक बेक्ट्रीया आधारित होते है , इस सिस्टम मे सीवेज को लगातार हवा के संपर्क मे रखना होता है। जिसके लिए अवाधित उर्जा सप्लाय की जरूरत परती है, वही इको एसटीपी एनेरोबिक बेक्ट्रीया आधारित होते है जिसे चलाने के लिए न आक्सीजन की जरूरत परती है और न ही किसी उर्जा स्रोत की, इस तरह यह बिलकुल प्राकृतिक और गैर-रासायनिक तरीके से पानी को साफ करता है पारम्परिक एसटीपी मे सीवेज पर लगातार हवा डालने के लिए आम तौर पर सात हार्स पॉवर का मोटर लगा रहता है जो लगातार चलाते रहना परता है वही इको एसटीपी में सूक्ष्म जिवाणू पौधों और बर्जारी से भरे अलग अलग चेमबरो से सीवेज को गुजार कर गंदे पानी को प्राकृतिक तरीको से साफ कर दोबारा इस्तमाल के लायक बनाया जा...
Every body needs to Think...........................