पानी की अहमियत एक प्यासा ही जान सकता है उसी प्रकार जो ये समझते है की आने वाले समय में हम पानी के बिना कितना असहज महसूस करेंगे ये समझने की बात है। वर्तमान मे किसी भी मनुष्य को इस ओर ध्यान इंगित नहीं है अभी हम पानी से तृप्त है कल का हम आज क्यों सोंचे हम तो सुरक्षित है पानी मनुष्य की हर मर्ज की दवा है चाहे वो माने या न माने मनुष्य के शरीर से ही शुरु करते है तो पाते है की उस का शरीर मे 75% पानी है जिस को चलाने के लिए हर घंटे उस को पानी की आवश्यकता परती है इस की कमी से वो कितने दिन जिन्दा रह सकता है इस की परिकल्पना की जा सकती है।
जल संकट से जूझती धरती जल के बारे में नहीं सोचा गया तो जीवन संकट में पर सकता है। घरेलू सवास्थ संबंधित सर सफाई के लिए जल की अव्सकता पड़ती है। आसानी से उपलब्ध जल को बर्बादी से रोकना चाहिए दो हज़ार बतीस ( 2032) के आकडे के अनुसार विश्व का हर आदमी जल की कमी अनुभव करेगा। इस तरह से जल पर नहीं सोचा गया तो वह दिन दूर नहीं जब तीसरा महायुद्ध जल के लिए ही लड़ा जायेगा। दूर दूर तक बाल्टी ले कर पानी की तलाश करना पड़ेगा मिलों दूर तक भी जल का नामो निशान नहीं होगा। जल का आकाल इस तरह से सुरसा की तरह मुख फैलाते चला जा रहा है की देखते देखते हजारों हजार , लाखों - लाख लीटर जल रखने वाला जलाशय सुख गए है। नदियों को तो और भी हाल बुरा है। गंगा, जमुना, सतलज आदि नदियाँ जल को तरस रही है। पर्यावरण के साथ- साथ जल का भी हाथ ज़ुरा हुआ है इसके बिना काम नहीं चलने वाला। जल प्रकृति का संरक्षण करती है आज कल बढती आबादी कल कारखाने प्रकृति का शोषण कर रही है। हर मनुष्य केवल आपने बारे में सोच रहा है। केवल आपना फायदा देखता है आज कल सभी इन्सान आराम तलब हो गए है खेती कोई करना नहीं चाहता है जिस से प्रकृति हरी भरी रहे।धरती हरी भ...