आपनी जीवन तक सीमित
लोगों से अपील है की इस पोस्ट का ना पढ़े।
दुनिया भर में पिने
वाले पानी 1% तरल रूप में और 2% ठोस रूप में यानि बर्फ के रूप में जमे हुए है। 97% पानी
दुनिया में में सुमुन्द, सागर और महासागर में है जो की पिने के लायक नहीं है । अगर इसे बचाया नहीं गया तो एक दिन यह समाप्त हो जायगा और
यह दुनिया के सारे जीव, मानव, प्राकृतिक संसाधन, फूल, फल सभी को समाप्त कर देगा।
ऐसा मेरा मानना है अलग लोगों का अलग विचार हो सकते है।
अभी भी हमारे
वज्ञानिक समुंदर के खारे पानी को पिने लायक बनाने में जुड़े हुए है और प्रयासरत है। क्या हमें नहीं लगता की हम आपने बहुमूल्य
पिने वाले पदार्थ “पानी” को बचाए
जिसके बिना जीवन की कल्पना करना नामुमकिन है।
भोजन के बिना कुछ
दिनों तक हम जीवित रह सकते है लकिन पानी के बिना कुछ घंटे या 2-5 दिन या 10 दिनों तक जीवित रह सकते है । हम क्यों कहते है “एक बूंद जिंदिगी की” पानी की एक – एक बूंद में हम और हमारा जीवन
बसता है इसीलिए हम सभी को मानना होगा की
पानी को बचाए और जिंदिगी को पाए।
पानी इसलिए भी
ज्यादा उपयोगी है और समाप्त होने वाला पदार्थ है की यह पदार्थ हम मनुष्यों तक ही
सिमित नहीं है बल्कि दुनिया के सारे जीव और जंतु को भी पानी की उतनी ही जरुरत है
जितने हम मनुष्यों को और दुनिया भर में उगने वाले पेड़-पौधे, घास, फूल-पतियों,
सब्जी , अनेको प्रकार के खाद्य ( खाने वाले) पदार्थ को सिंचित करने के लिए पानी की
अवश्यकता होती है । तो हम और हमारा समाज इस बहुमूल्य पदार्थ से ऐसे
जुड़ा हुआ है “जैसे प्यासा और कुआं” ।
मानसिकता हसे जुड़ा हुआ है यह “पानी”
मन की स्थिति मानव
या जानवर के तब पता चलती है जब वो प्यासा हो भूखा हो । प्यास और भूखे को पानी और
भोजन मिल जाये तो उसके चेहरे का भाव ही बता देगा को वह तृप्त और भोजन करने के बाद
वह पूरी तरह से संतुस्ट और तृप्त हो चूका है । अब वह पूरी तरह से दुसरे कामों में
मन को लगाएगा ।
इतने बहुमूल्य
पदार्थ को मानव यु ही बर्बाद हो रहा है । इसका संरक्षण हम अपने घरों से ही कर सकता
है ...........................!!!!!!!!!!!!!!!!!!! (क्रमश ................)
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